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| Banke Bihari Temple |
वृंदावन में स्थित प्रसिद्ध श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक अनूठी और दुखद घटना घटी। मंदिर की दीर्घकालिक परंपरा जो मंदिर में प्रतिदिन ठाकुर जी को विभिन्न प्रकार के भोग लगाने की होती है, वह पहली बार टूटी। मंदिर में सुबह बाल भोग और शाम को शयन भोग नहीं लगाया गया। इस परंपरा का टूटना खासतौर पर इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि यह भोग मंदिर के हलवाई द्वारा तैयार होता है, जिसे पिछले कुछ महीनों से वेतन नहीं मिला था। वेतन भुगतान न होने के कारण हलवाई ने ठाकुर जी के लिए भोग बनाना बंद कर दिया, जिससे मंदिर में एक बड़ी असुविधा और चिंता पैदा हो गई।
श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन भक्त और श्रद्धालु देश-विदेश से लाखों की संख्या में आते हैं। मंदिर में दैनिक रूप से चार बार भोग लगाना अनिवार्य होता है जिसमें बाल भोग, राजभोग, उत्थापन भोग और शयन भोग शामिल हैं। यह भोग मंदिर के विशेष हलवाई द्वारा बनकर अर्पित किया जाता है जो कि मयंक गुप्ता नाम के व्यक्ति के पास जिम्मेदारी के रूप में है। हलवाई को मासिक वेतन के रूप में करीब 80,000 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वेतन भुगतान में देरी हो रही थी। इसी कारण हलवाई ने ठाकुर जी के लिए भोग तैयार करना बंद कर दिया।
| Banke Bihari Temple |
मंदिर के गोस्वามियों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। गोस्वामीगण ने कहा कि यह परंपरा मंदिर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका किसी भी हाल में उल्लंघन सहन नहीं किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एक हाई पावर कमेटी गठित की गई है, जो मंदिर की व्यवस्था का निरीक्षण करती है। इस समिति का एक सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि जैसे ही इस घटना की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत मयंक गुप्ता से इस मामले की पूछताछ की। मयंक ने बताया कि हलवाई को वेतन नहीं मिलने की वजह से भोग तैयार नहीं हो पाया।
इस घटना के बाद कमेटी ने तत्काल हलवाई को बकाया वेतन का भुगतान करने के आदेश जारी किए हैं और भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। मंदिर के व्यवस्थापक और कमेटी के सदस्य इस बात को लेकर गंभीर हैं कि भोग की परंपरा मंदिर के भक्तों की आस्था और विश्वास का अहम हिस्सा है, इसलिए इसे बनाए रखना जरूरी है। मंदिर परिसर में इस घटना को लेकर श्रद्धालुओं में भी चिंता और निराशा व्याप्त है।
यह दूसरी जगह नहीं है जहां धार्मिक स्थलों में व्यवस्थागत दिक्कतें पूजा-अर्चना और परंपराओं को प्रभावित कर रही हों, लेकिन बांके बिहारी मंदिर जैसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थल की यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मानी जा रही है। पहले भव्य और शानदार भोगों के लिए जाना जाने वाला यह मंदिर आज इस घटना के चलते चर्चा में है। मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी बनी है कि वे अपने कर्मियों के अधिकारों और सम्मान को समय रहते सुरक्षित करें ताकि धार्मिक क्रियाकलाप सुचारू रूप से चलते रहें।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि धार्मिक संस्थानों में भी आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दे कितने महत्वपूर्ण होते हैं, जो उनके दैनिक क्रियाकलापों पर सीधा असर डालते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में तत्काल सुधार होगा और जल्दी ही श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की भोग की परंपरा पुनः अपने पूर्ण स्वरूप में स्थापित हो जाएगी, जिससे भक्तों को श्रद्धा और विश्वास के साथ दर्शन का अवसर मिलता रहेगा।
इस प्रकार, बांके बिहारी मंदिर में पूजा व्यवस्था की एक पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा पिछले कुछ महीनों की देरी के चलते टूट गई है, लेकिन मंदिर प्रशासन ने इसे सुधारने के लिए कदम उठाए हैं ताकि आने वाले दिनों में ऐसी समस्या न हो और मंदिर की धार्मिक परंपराएं कायम रहें।

