Kanwar Yatra Importance: सावन माह को भगवान शिव की भक्ति और उपासना का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान भक्त विशेष रूप से व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और शिव की पूजा करते हैं। सावन की सबसे प्रमुख विशेषता कांवड़ यात्रा है, जिसमें श्रद्धालु गंगा जल लेकर भगवान शिव के शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा एक विशेष आस्था, श्रद्धा और निष्ठा का प्रतीक बन चुकी है, जिसमें लाखों भक्त भाग लेते हैं।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कब से होगी?
सावन माह भगवान शिव के पूजन का अत्यधिक महत्वपूर्ण समय होता है, और इस साल 2025 में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई को रात 2:06 बजे होगी, जबकि इसका समापन 9 अगस्त को होगा। इस बार सावन माह 30 दिनों का रहेगा, और कांवड़ यात्रा भी 11 जुलाई से शुरू हो जाएगी। यह यात्रा शिवरात्रि तक जारी रहेगी, जो इस साल 23 जुलाई को मनाई जाएगी। कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री जैसी पवित्र स्थलों से गंगा जल लेकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। इस यात्रा का महत्व खासतौर पर सावन शिवरात्रि के दिन बढ़ जाता है, जब विशेष रूप से जल चढ़ाने का अत्यधिक पुण्य माना जाता है।
कांवड़ यात्रा के प्रकार
कांवड़ यात्रा को चार प्रमुख प्रकारों में बांटा जाता है, जो भक्तों की आस्था, सामर्थ्य और नियमों के अनुसार होते हैं:
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सामान्य कांवड़ यात्रा – इस यात्रा में भक्त अपने इच्छानुसार रुकते हुए गंगा जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा सबसे सामान्य रूप है।
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खड़ी कांवड़ यात्रा – इसमें कड़े नियम होते हैं। भक्त गंगा जल लाकर कांवड़ को पूरे रास्ते पर कंधे पर उठाए रखते हैं और उसे जमीन पर नहीं रखते। यह यात्रा सामूहिक रूप से की जाती है।
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दांडी कांवड़ यात्रा – इस यात्रा में भक्त हर कुछ कदम पर दंडवत प्रणाम करते हुए यात्रा करते हैं। इसे सबसे कठिन यात्रा माना जाता है क्योंकि इसमें भक्त जमीन पर लेट-लेट कर बढ़ते हैं।
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डाक कांवड़ यात्रा – यह सबसे तेज़ और दौड़ते हुए की जाने वाली यात्रा होती है, जिसमें भक्त गंगा जल लेकर बिना रुके शिवधाम की ओर बढ़ते हैं।
कांवड़ यात्रा के नियम
कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले भक्तों को कई नियमों का पालन करना होता है, जिनमें से कुछ मुख्य हैं:
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भक्तों को सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए और यात्रा से कुछ समय पहले मांसाहार, प्याज, लहसुन, शराब, सिगरेट, तंबाकू आदि से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
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यात्रा के दौरान उनके मन में कोई बुरा विचार नहीं आना चाहिए।
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गुस्सा, नफरत या घृणा से बचना चाहिए।
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यात्रा पूरी श्रद्धा, संयम और अनुशासन के साथ की जाती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
सावन शिवरात्रि कब है?
2025 में सावन माह की शिवरात्रि 23 जुलाई को मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। इस साल चतुर्दशी तिथि का आरंभ 23 जुलाई को सुबह 4:39 बजे से होगा, और समापन 24 जुलाई की रात 2:28 बजे होगा। शिव भक्त इस दिन उपवासी रहकर व्रत-पूजन करते हैं और रात को भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, जिससे उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
समाप्ति
कांवड़ यात्रा की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है और सावन शिवरात्रि 23 जुलाई को मनाई जाएगी। यह पर्व आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शिव के आशीर्वाद के लिए अपनी यात्रा पूरी करते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए यात्रा जानकार उत्तरदायी नहीं है।

