हर साल 15 जून को उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम का स्थापना दिवस बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। 2025 में यह 61वां स्थापना दिवस है, जिसे लेकर देश-विदेश से श्रद्धालु आश्रम पहुंचते हैं। नीम करौली बाबा, जिन्हें लोग प्रेम और आस्था से "बाबा नीब करौरी" भी कहते हैं, के इस धाम में भक्ति का महासंगम देखने को मिलता है। मंदिर को सुंदर फूलों, दीपों और रंगोली से सजाया जाता है। इस दिन बाबा का स्मरण और आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
यदि आप आश्रम नहीं जा सकते तो ऐसे करें बाबा से अर्जी: अगर आप किसी कारणवश कैंची धाम नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो भी आप घर बैठे बाबा से जुड़ सकते हैं। प्रातः स्नान कर एक स्वच्छ स्थान पर बाबा नीम करौली जी की तस्वीर रखें। फिर शांत मन से उनका ध्यान करते हुए सच्चे मन से अपनी प्रार्थना करें। ऐसा माना जाता है कि बाबा की कृपा से हर सच्चे मन की अर्जी जरूर सुनी जाती है।
भोग और मंत्र: इस शुभ अवसर पर बाबा को मालपुए का भोग विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। आप भी श्रद्धा से मालपुए बनाकर भोग लगाएं। पूजा के समय यह मंत्र जपना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
"मैं हूँ बुद्धि मलिन अति, श्रद्धा भक्ति विहीन।
करू विनय कछु आपकी, होउ सब ही विधि दीन।।"
यह प्रार्थना एक विनम्र निवेदन है कि चाहे हमारे भीतर श्रद्धा की कमी हो, पर बाबा की कृपा हमें जीवन के हर मार्ग पर प्रकाश दे।
कैंची धाम का स्थापना दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और बाबा से आत्मिक जुड़ाव का दिन है। चाहे आप मंदिर में हों या घर पर, सच्चे मन से बाबा को याद करें, भक्ति करें और जीवन में उनकी कृपा से उजाला भरें। यही दिन है जब आपकी प्रार्थना सीधे बाबा के चरणों तक पहुंचती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी मान्यताओं पर आधारित है। YatraJaankaar इसकी पुष्टि नहीं करता है।

