खाटू श्याम फाल्गुन लक्खी मेला 2026: 21 से 28 फरवरी तक भव्य आयोजन, जगन्नाथ शैली में सजा मंदिर

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 खाटू श्याम मेला 2026: हाथी झांकी और महाभारत दृश्यों से जगमगाएगा बाबा का दरबार, 120 कारीगरों की मेहनत।

मेला तिथियां और अवधि

खाटू श्याम जी मंदिर में बाबा श्याम का प्रसिद्ध फाल्गुनी लक्खी मेला 21 फरवरी 2026 से शुरू होकर 28 फरवरी तक आयोजित होगा, जो आमलकी एकादशी (27 फरवरी) पर चरम पर पहुंचेगा। इस बार मेला 8 दिनों का होगा, जो पहले से कम है ताकि भीड़ प्रबंधन बेहतर हो सके। श्री श्याम मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं पर बैठक कर सभी तैयारियां अंतिम रूप दे दी हैं।

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भव्य सजावट की विशेषताएं

मंदिर को जगन्नाथ मंदिर और श्याम दरबार शैली में सजाया जा रहा है, जिसमें मुख्य द्वार पर हाथियों की भव्य झांकी प्रमुख होगी। भगवान विष्णु, ब्रह्मा, शिव, श्रीकृष्ण, हनुमान सहित देवी-देवताओं की सजीव प्रतिमाएं और महाभारत कालीन दृश्य थर्माकोल, बांस, जरी व कृत्रिम फूलों से बनाए जा रहे हैं। 120 बंगाली कारीगर दिन-रात कार्यरत हैं, जो पिछले वर्षों से अधिक दिव्य अनुभव प्रदान करेगा।


सजावट और थीम की खासियत

मंदिर परिसर को इस वर्ष विशेष थीम पर सजाया जा रहा है, जिसमें जगन्नाथ मंदिर और श्याम दरबार की झलक मुख्य आकर्षण होगी। मुख्य द्वार पर हाथियों की भव्य झांकी, भीतर भगवान विष्णु, ब्रह्मा, शिव, श्रीकृष्ण, हनुमान आदि देवताओं की सजीव प्रतीत होने वाली प्रतिमाएं और हाथी, शेर व अन्य पौराणिक पात्रों की झांकियां तैयार की जा रही हैं। महाभारत काल के दृश्य, थर्माकोल, बांस, कपड़ा, जरी और कृत्रिम फूलों से पूरे परिसर को दिव्य रूप दिया जा रहा है, जिसके लिए करीब 120 बंगाली कारीगर दिन-रात सजावट में जुटे हैं।


खाटू श्याम फाल्गुन लक्खी मेला

यात्रा, रूट और पार्किंग

खाटू धाम तक पहुंचने के लिए नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन रींगस है, जहां से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर खाटू स्थित है। मेले के दौरान रींगस से खाटू तक का पूरा मार्ग भक्ति माहौल से भर जाता है, जगह-जगह भंडारे, पानी की व्यवस्था और सेवा-शिविर लगे रहते हैं, और अनेक भक्त निशान लेकर पैदल यात्रा करते हैं। दिल्ली–जयपुर–रींगस–खाटू रूट पर बसों, निजी वाहनों और कई अतिरिक्त ट्रेनों/बसों की व्यवस्था की जा रही है, जबकि खाटू के आस-पास के हिस्सों में नो-व्हीकल या नियंत्रित यातायात ज़ोन बनाकर पार्किंग पॉकेट तय किए जाते हैं।


श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुझाव
फाल्गुन शुक्ल एकादशी और द्वादशी (27–28 फरवरी के आसपास) को सबसे अधिक भीड़ रहने की संभावना है, इसलिए यदि इन मुख्य तिथियों पर दर्शन करने का इरादा हो तो कम से कम एक दिन पहले पहुंचना बेहतर माना जा रहा है। कम भीड़ में शांतिपूर्ण दर्शन के लिए कई स्थानीय व लॉजिस्टिक रिपोर्ट्स सुबह 4–7 बजे या देर शाम 8–9 बजे के स्लॉट में दर्शन करने की सलाह देती हैं। यात्रा से पहले आधिकारिक मंदिर/जिला प्रशासन के ताज़ा निर्देश, यातायात परामर्श, और आवास बुकिंग की जानकारी अवश्य चेक करना उचित रहेगा, क्योंकि भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए बीच में भी कुछ व्यवस्थाएं बदली जा सकती हैं।

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